छाते की आत्मकथा पर हिंदी निबंध | Essay on Autobiography of Umbrella in Hindi

छाते की आत्मकथा पर हिंदी निबंध | Essay on Autobiography of Umbrella in Hindi मैं हूँ सबकी प्यारी छतरी जो सबको बरसात में भीगने से और गर्मी में धुप से बचाती हूँ लोग अपने आवश्यकता अनुसार मेरा चयन करते है जैसे किसी को बड़ी छतरी पसंद है तो वह बड़ी साइज़ की छतरी लेता है किसी को छोटी पसंद तो वह छोटी साइज़ की लेता है आजकल तो मैं फोल्डिंग साइज़ में भी आती हूँ भारत में मुझे उन्नीसवीं सदी के अंत से जाना जाता है

छाते की आत्मकथा पर हिंदी निबंध | Essay on Autobiography of Umbrella in Hindi

लोगो को मैं बरसात में काफी याद आती हूँ क्योकि मेरा इस्तेमाल सबसे ज्यादा बरसात में ही होता है जैसे किसी को ऑफिस जाना है किसी को स्कूल और किसी को बाजार से सामान लाना है में सबके काम आती हूँ सच में बरसात में मेरे बिना लोगो के बहुत से काम रुक जाएंगे तभी तो लोग पूरी बरसात अपने साथ ही रखते है क्या पता कब तेज बारिश हो जाये और मेरी जरुरत पड़ जाए मैं सभी की मदद करती हूँ

लेकिन बरसात जाते ही लोग मुझे भूल जाते है और मैं कही किनारे पड़े पड़े बोर होती हूँ और बरसात के आने का इंतज़ार करती हूँ की कब बरसात आएगी और लोग मुझे बहार लेजाकर बारिश की बूंदो की ठंडक का एहसास दिलवाएंगे मुझे लोगो की मदद करने में बहुत आनंद आता है क्योकि मैं खुद भीगकर सभी लोगो को बारिश से बचती हूँ वरना लोग भीगकर बीमार पड़ जाते जिससे मुझे बहुत बुरा लगता

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मेरा जीवन और जन्म बड़ा ही शानदार है मेरा जन्म छोटे बड़े कारखानों में होता है जहा पर मुझे अलग अलग आकर में बनाया जाता है फिर एक पन्नी या डिब्बे में मुझे पैक करके छोटी बड़ी गाड़ियों से दुकानंदार तक पहुंचाया जाता है बरसात आते ही छोटे बड़े सभी लोग मुझे खरीद लेते हैं जिससे वो बरसात में बिना भीगे और बिना किसी दिक्कत से अपने सभी जरुरी काम कर ले

मैं पुरे जीवन लोगो की मदद ही करती हूँ लेकिन कुछ लोग मुझे इस्तेमाल करके लापरवाही से रखते और पटक देते हैं जिससे मेरी हालत बिगड़ जाती है फिर वो मुझे छतरी बनाने वाले के पास ले जाकर सही करवाते है जिससे मुझे फिर से एक नया जीवन मिल जाता है और मैं फिर से उनकी मदद करती हूँ

आशा करते है आपको छाते की आत्मकथा पर हिंदी निबंध पसंद आया होगा

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